क्या मधुमेह की चिकित्सा सम्भब हे ? जानिए मधुमेह की कारण लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार |

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मधुमेह क्या है ?

पहले तो मधुमेह एक ऐसी बीमारी हे जो अगर किसीको एक बार होगया तो उसे जीबन वर के लिए नहीं छोड़ता हे। आज कल की भाग दौड़ भरी जिंदगी मैं अनियमित जिबनसाइली मैं अगर कोई रोग ज्यादातर लोगों को प्रभाबित करती हे तो वो हे मधुमेह। तो मधुमेह की चिकित्सा क्या हे ?

इस रोग का एक बुरा कारन ये हे की ये रोग होने वाले बक्ति की सरीर मैं काई सरे अन्य रोगों को वि आमत्रित करता हे। मधुमेह पहले तो ४० उम्र के बाद की लोगों को होता था। पर अभी ये बच्चों को वि होना सुरु होगया हे। इसका एक बड़ा वजह ये होताहै की बचे अब ज्यादातर पर घर का खाना न खा कर ज्यादा बाहर का खाना पसंद करतें हैं। तो मधुमेह की चिकित्सा क्या हे ?

क्या पीठ और कमर के दर्द का इलाज आयुर्वेदिक मैं सम्भब हे ? आइये जानते हैं इसका कारण लक्षण और इलाज।

मधुमेह होने की कारण

मधुमेह होने की पहला कारण ये हे वो एक  बंशानुगत रोग कहाजाता हे। अगर किसीमाता-पिता को मधुमेह होताहै तो उनकी बच्चों को वि ये रोग होने की सम्भाबना होतें हैं। और दूसरा कारन ये हे खानपान की अनियमितता के कारन अगर हम ज्यादा फास्ट फूड और मिट कहते हैं और ब्यायाम या फिजिकल एक्टिविटी नहीं करते तो इ रोग होना एक बड़ा कारन होता हे।तो मधुमेह की चिकित्सा क्या हे ?

खतरा

आज कल बहुत सरे लोग हार्ट अटैक या स्ट्रोक के कारन उनके मोत होजाते हैं।  क्या आप को पता हे की इसका कारण वि मधुमेह ही होता हे। मधुमेह होने के कारण  शरीर में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ने से हार्मोनल बदलाव होता है और कोशिशएं क्षतिग्रस्त होती हैं जिससे खून की नलिकाएं और नसें दोनों प्रभावित होती हैं। इससे धमनी में रुकावट आ सकती है या हार्ट अटैक हो सकता है।

ख़ून में हाई ब्लड शुगर लेवल के साथ ही इंसुलिन की मौजूदगी से दूसरी चीज़ों पर असर पड़ता है जो आखिरकार शरीर को अलग-अलग तरीकों से नुकसान पहुंचाते हैं. सरीर मैं ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करके इन नुकसान से बचा जा सकता है या इन्हें ज़्यादा से ज़्यादा समय तक दूर रखा जा सकता है. तो मधुमेह को नियंत्रण मैं ला सकते है।

लक्षण

  • आँखों की रौशनी कम होना
  • चक्कर आना
  • चिड़चिड़ापन
  • ज्यादा प्यास लगना
  • कोई भी चोट या जख्म देरी से भरना
  • हाथों, पैरों और गुप्तांगों पर खुजली वाले जख्म
  • बार-बर फोड़े-फुंसियां निकलना
  • बार-बार पेशाब का आना

मधुमेह से बचने की कुचज उपाय

अपनी जीबन सैली मैं कुछ बदलाब लाइ रोज शारीरिक श्रम करें, नियमित ब्यायाम करें, दिन में तीन से चार किलोमीटर तक जरूर पैदल चलें या फिर योग करें। कम कैलोरी वाला भोजन खाएं। मधुमेह रोगियों को अपने भोजन में करेला, मेथी, सहजन, पालक, तुरई, शलगम, बैंगन, परवल, लौकी, मूली, फूलगोभी, ब्रौकोली, टमाटर, बंद गोभी और पत्तेदार सब्जियों को शामिल करना चाहिए।

खाने में बादाम, लहसुन, प्याज, अंकुरित दालें, अंकुरित छिलके वाला चना, सत्तू और बाजरा आदि शामिल करें तथा आलू, चावल और मक्खन का बहुत कम उपयोग करें। भोजन में मीठे को बिलकुल न खा ये । मधुमेह रोगियों को फलों में जामुन, नींबू, आंवला, टमाटर, पपीता, खरबूजा, कच्चा अमरूद, संतरा, मौसमी, जायफल, नाशपाती को शामिल करें।

आम, केला, सेब, खजूर तथा अंगूर नहीं खाना चाहिए क्योंकि इनमें शुगर ज्यादा होता है। हरी सब्जियां, ताज़े फल, साबुत अनाज को अपने भोजन में शामिल कीजिये। इसके अलावा फाइबर का भी सेवन करना चाहिए। दिन में तीन समय खाने की बजाय उतने ही खाने को छह या सात बार में खाएं। धूम्रपान और शराब का सेवन बिलकुल वि न करें। रात को पर्याप्त नींद लें। कम नींद सेहत के लिए ठीक नहीं है। ज्यादा टेंशन नहीं ले। खुद को तनाब से दूर रखने के लिए ध्यान करे।

मेथी :

मेथी हमारे शरीर में इंसुलिन को कम करने में बेहद सहायता करती है। 2 महीने तक मेथी के बीजों का नियमित प्रयोग करने से आपके शरीर का शुगर लेवल कम हो सकता है। मधुमेह के रोगियों के लिए यह एंटी-डायबिटिक जड़ी-बूटी बहुत ही ताकतवर और असरदार है।

व्यायाम

रोज़-मर्रा की ज़िन्दगी में कम-से-कम 30 – 40 मिनट व्यायाम करना आपके लिए महत्वपूर्ण है| रोज व्यायाम जैसे योग करने से या रोज़ टहलने से ग्लूकोज़ लेवल पर प्रभाव पड़ता है | और खाने के एक घंटे बाद धीमी गति से टहल ने से स्वास्त्य में बदलाब देख सकते हैं।

नीम:

नीम एक आयुर्वेदिक औषधि है, जो शरीर की ग्लूकोज को बर्दाश्त करने की क्षमता को बढ़ाता है ।  जो मधुमेह के वजह से किडनी की परेशानियों से ग्रसित हो गए हैं। और इसीलिए, यह हमारे आयुर्वेदिक चिकित्सकों का सबसे पसंदीदा विकल्प है। मधुमेह लोगों को निम् की पते को  धुप मैं सूखा के उसकी चूर्ण बनाकर रोजाना  करनी चाहिए।

गुड़मार:

चिकित्सकीय गुणों से भरपूर यह जड़ी-बूटी रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) के स्तर को काफी कम कर सकती है। यह अग्नाशय में बीटा कोशिकाओं के निर्माण में मदद करके इंसुलिन पर आपकी निर्भरता को कम देती है। गुड़मार एक ह्यपोग्लैमिक जड़ी-बूटी है और मधुमेह के लिये आयुर्वेद द्वारा सुझाया गया एक प्रसिद्ध उपचार है।

साबधान: कोई वि आयुर्वेदिक जड़ी बूटी को इस्तिमाल करनेसे पहले और्वेदिक डॉक्टर की  परामर्श करें।

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